सोजत में गूंजी गुरु महिमा की वाणी
सोजत में गूंजी गुरु महिमा की वाणी संत माधवदास साहेब के प्रवचनों ने बांधा समा
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सोजत के कृषि मंडी रोड पर चल रहे 11 दिवसीय भव्य सत्संग कार्यक्रम में गुरुवार को कबीरपंथी संप्रदाय के संत माधवदास साहेब के ओजस्वी प्रवचनों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सैकड़ों भक्तों की उपस्थिति में संतश्री ने गुरु की असीम महिमा, उनके जीवन में महत्व और मार्गदर्शन की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला।प्रवचन के दौरान संत माधवदास साहेब ने कबीर साहेब का प्रसिद्ध दोहा “सब धरती कागज करूं…” उद्धृत करते हुए कहा कि गुरु के गुण इतने विशाल और अनंत हैं कि उनका वर्णन करना संभव ही नहीं। उन्होंने कहा कि गुरु का ज्ञान अनमोल है, वही जीवन का प्रकाश है और वही मानव को सही दिशा देता है।उन्होंने आगे कहा कि जो व्यक्ति जीवन में गुरु के महत्व को नहीं पहचान पाता, वह अंधे के समान है। संतश्री ने गुरु के स्थान को सर्वोपरि बताते हुए कहा, “हरि रूठ जाए तो स्थान है, गुरु रूठने पर नहीं”— अर्थात भगवान को मनाना संभव है, लेकिन गुरु यदि अप्रसन्न हो जाएं तो कहीं भी शरण नहीं मिलती। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को गुरु के बताए मार्ग पर चलकर जीवन को सार्थक बनाने का संदेश दिया।कार्यक्रम में संत झुपरदास साहेब, विदुरदास साहेब, भंवरलाल साहेब और साध्वी शांति बाई ने भी अपने प्रवचनों से उपस्थित जनसमूह को लाभान्वित किया।सत्संग में सोहनलाल तंवर, प्रभुलाल, देवीलाल, राजेंद्र कुमार, आत्माराम, लुंबाराम, गणपत लाल, प्रियंका सांखला, खुशबू भाटी, दुर्गा राम, हीरालाल, कैलाश सांखला सहित बड़ी संख्या में स्थानीय भक्तों ने भाग लिया।कार्यक्रम के दौरान भक्ति गीतों, कथाओं और गुरुमहिमा के व्याख्यानों से संपूर्ण परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।
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