पाली आंख ईश्वर प्रदत्त मनुष्य शरीर का सबसे संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण अंग : डॉ. वाडेकर दंपति
पाली। आंखें ईश्वर द्वारा प्रदत्त मनुष्य शरीर का सबसे महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील अंग हैं, जिनके माध्यम से हम ईश्वर की बनाई हुई सुंदर सृष्टि का साक्षात्कार करते हैं। यह विचार सुप्रसिद्ध नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मिथुन वाडेकर जैन (एमबीबीएस, एमएस) एवं डॉ. नयना वाडेकर जैन (एमबीबीएस, एमएस – आई सर्जन), महावीर हॉस्पिटल पाली ने अभिनव कला मंच के सचिव चेतन व्यास के साथ बातचीत के दौरान व्यक्त किए।
डॉ. मिथुन वाडेकर ने आंखों की प्रमुख बीमारियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मोतियाबिंद, ग्लूकोमा (काला मोतिया), डायबिटिक रेटिनोपैथी एवं उम्र से संबंधित मैकुलर डिजनरेशन (एएमडी) आंखों की गंभीर बीमारियों में शामिल हैं, जो समय पर उपचार नहीं होने पर दृष्टि हानि का कारण बन सकती हैं। इसके अतिरिक्त धुंधली दृष्टि (मायोपिया एवं हाइपरोपिया), ड्राई आई सिंड्रोम एवं कंजंक्टिवाइटिस (आई फ्लू) भी आम समस्याएं हैं।
उन्होंने बताया कि—
मोतियाबिंद (Cataract) में आंख का प्राकृतिक लेंस धुंधला हो जाता है, जिससे देखने में कठिनाई होती है।
ग्लूकोमा (Glaucoma) को “दृष्टि का मूक चोर” कहा जाता है, क्योंकि यह बिना लक्षण के आंख की ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचाता है।
अपवर्तक त्रुटियां (Refractive Errors) जैसे मायोपिया (दूर का न दिखना) और हाइपरोपिया (पास का न दिखना) आम समस्या है।
डायबिटिक रेटिनोपैथी मधुमेह रोगियों में रेटिना की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती है।
डॉ. नयना वाडेकर ने बताया कि आंखों की अन्य प्रमुख समस्याओं में ड्राई आई सिंड्रोम, कंजंक्टिवाइटिस (आई फ्लू), एज-रिलेटेड मैकुलर डिजनरेशन (AMD) एवं प्रेस्बायोपिया शामिल हैं। प्रेस्बायोपिया आमतौर पर 40 वर्ष की आयु के बाद होता है, जिसमें पास की वस्तुएं देखने में कठिनाई होती है।
नेत्र रोगों के सामान्य लक्षणों में अचानक धुंधली दृष्टि, आंखों में दर्द या लाली, रोशनी के प्रति अधिक संवेदनशीलता तथा दृष्टि का अचानक कम होना शामिल है।
बचाव एवं देखभाल के संबंध में डॉ. वाडेकर दंपति ने कहा कि समय-समय पर नेत्र विशेषज्ञ से जांच कराना आवश्यक है। साथ ही विटामिन-युक्त एवं पौष्टिक आहार, संतुलित जीवनशैली और आंखों की स्वच्छता से कई बीमारियों से बचाव संभव है।
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